भाइयों और बहनों, सबसे पहले आप ये जानिए कि ये जाति की लिस्ट जारी करने की कानूनी प्रक्रिया क्या है। सबसे पहले भारत के संविधान में आरक्षण के प्रावधान को लागू करने के लिए 1950 में schedule caste order और schedule caste order निकाला गया। इन आदेशों में जो जातियां लिखी गई वो 1931 की जनगणना से ली गई। 1931 में हर भाषा क्षेत्र की जातियों की लिस्ट अलग बनाई गई थी इसलिए ये लिस्ट भी भाषा आधारित क्षेत्रों के लिए निकाली गई। यही प्रक्रिया 1993 में ओबीसी आर्डर निकालने के समय अपनाई गई। अब गड़बड़ी क्या हुई कि 1931 की सभी भाषा क्षेत्र की जातियों की लिस्ट sc st के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1950 में जारी की गई थी लेकिन केंद्र सरकार ने सिंधी भाषी क्षेत्र की sc st की लिस्ट नही निकाली। इसलिए सिंधी भाषी समाज को शुरू से ही आरक्षण से वंचित रखा गया। अब जिन्होंने ने sc st या obc के आरक्षण लिए हैं कानून से गलत है क्योंकि आप किसी और भाषा की जातियों में जाकर अपनी जाति क्लेम नहीं कर सकते। जैसे कि तमिल क्षेत्र का कोई सफाई कर्मी तेलुगू क्षेत्र की जाति लिस्ट में जाकर कोई क्लेम नहीं कर सकता। हर भाषा क्षेत्र का व्यक्ति सिर्फ अपने भाषा क्षेत्र की लिस्ट में ही अपनी जाति क्लेम कर सकता है।जब तक सरकार सभी भाषाओं के जातियों के sc st obc लिस्ट की तरह सिंधी भाषी क्षेत्र की उसी प्रकार की लिस्ट नहीं निकालती, सभी सिंधी सामान्य जाति के रहेंगे। इस सूचना से कुछ लोग परेशान हो सकते हैं पर कानून तो कानून है कोई क्या कर सकता है। अब ये सिंधी समाज की जिम्मेदारी है कि सिंधी भाषी क्षेत्र की 1931 की कास्ट लिस्ट से sc st obc की लिस्ट पूरे भारत में लागू करने के लिए जारी करवाने का काम करे।
जय झूले लाल।
प्रिय सिंधी भाषी हिन्दु भाईयो एवं बहनों ,
आगामी सरकार द्वारा करायी जा रही जनगणना में जाति जनगणना भी एक अहम् मानक है , चूंकि इसके पहले सन 1931 में हमारे बुजुर्गो को जाति लिखवाने का सौभाग्य मिला था तब उन्होंने अपनी जाति सरकारी दस्तावेजो में दर्ज करायी थी । अब लगभग 95 वर्षो बाद हम सिन्धी भाषी ,जो विस्थापित हो कर आये है , हमें अपनी जाति को लिखने के लिए तैयार रहना होगा। अभी तक हम अपने पूर्वजों के नाम के आधार पर साधवानी, बंभानी, लालवानी आदि उपनामों का उपयोग करते रहे हैं। ये उपनाम बड़ो बुजुर्गो के नाम में ‘नी’ जोड़ कर चलने का प्रचलन विस्थापन के कारण ज्यादा प्रचलित हुए है जबकि ये जाति नहीं हैं। सिंधी हमारी मातृभाषा है। सरकार के कानून और उच्च न्यायालयों के निर्णयों के अनुसार सिंधी कोई जाति नहीं है। वास्तव में भाषा कभी भी जाति नहीं हो सकती, उदाहरण के लिए गुजराती, मराठी, तेलुगु आदि जाति नहीं हो सकती, क्योंकि सिंधी एक भाषा है, इसलिए जाति नहीं हो सकती। इसलिए हम जनगणना के जाति के कॉलम में अपना उपनाम और सिंधी नहीं लिख सकते। अब सवाल यह है कि हमारी जाति कौन सी है और हम अपनी जाति कैसे पता करें। भारत में पिछली जाति आधारित जनगणना 1931 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी। इस जनगणना में मराठी और गुजराती हिंदुओं की जातियों के साथ सिंध में रह रहे हिंदू (जो आज सिंधी भाषी हिन्दू कहे जाते है ) की 190 जातियों को सूचीबद्ध किया गया था। सन 1931 के बाद सरकार ने किसी भी जनगणना में जाति सूची जारी नहीं की है। भारत सरकार ने आगामी जनगणना में जाति सूची जारी करने का निर्णय लिया है। अतः आज सन 1931 की जाति जनगणना रिपोर्ट से हम हिन्दू सिंधी जान गए हैं कि हिन्दू सिंधियों की जातियाँ कौन-कौन सी हैं। अब हम अपनी जाति कैसे पता करें। एक सरल तरीका यह है कि हरिद्वार, गया, पुरी बद्रीनाथ आदि स्थानों पर ब्राह्मणों से संपर्क करें जहाँ हमारे पूर्वज धार्मिक उद्देश्यों से आए थे। ब्राह्मणों ने अपने दस्तावेजों में जाति सहित उनका विवरण दर्ज किया था। हम उस पृष्ठ की फोटो कॉपी ले सकते हैं जहाँ हमारे पूर्वज ने 1931 या 1931 से पहले अपनी जाति लिखवाई थी। 1931 क्यों, क्योंकि सरकार ने 1931 के बाद सामान्य रूप से कोई जाति सूची जारी नहीं की। ब्राह्मणों (पंडितों) के इस रिकॉर्ड से प्राप्त जाति के नाम का मिलान 1931 की जाति सूची से किया जाना चाहिए। यदि यह मेल खाता है, तो हमारी जाति की पुष्टि हो जाती है। यदि नहीं, तो हम आगामी जनगणना में इस जाति को जोड़ने के लिए सरकार को आवेदन करेंगे। दूसरा तरीका यह है कि भारत में किसी 30 साल पुराने सरकारी रिकॉर्ड में से किसी एक में जमीन, स्कूल या सरकारी नौकरी का रिकॉर्ड निकाला जाए, जहां हमारे पूर्वज ने अपनी जाति दर्ज कराई हो और जो 1931 की जनगणना की जाति सूची से मेल खाती हो। या आप के पास अपने बुजुर्गो के कोई दस्तावेज हो जिसमे उनकी जाति लिखी हुई हो ।
अब हम यह पता लगा रहे हैं कि एससी, एसटी, ओबीसी और जनरल के कॉलम में क्या लिखें क्योंकि हिंदू सिंधियों की एससी एसटी ओबीसी की जाति सूची सरकार द्वारा जारी नहीं की गई है। हम रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, नई दिल्ली से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, जो भारत में जनगणना के मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं, ताकि इस कॉलम को भरने का कोई रास्ता निकाला जा सके।
एक और बात यह है कि गोत्र और जाति अलग-अलग हैं। हमें अपनी जाति का पता लगाना चाहिए। आम तौर पर हिंदू सिंधी कश्यप गोत्र होते हैं क्योंकि हम ऋषि कश्यप के वंशज हैं। भारत में 8 ऋषियों के नाम पर 8 गोत्र हैं। एक गोत्र के अंतर्गत सभी जातियाँ हो सकती हैं। जातियाँ सैकड़ों में हैं जबकि गोत्र केवल 8 हैं।
उम्मीद है कि यह भारत में आगामी जनगणना में अपनी जाति लिखने के वर्तमान मुद्दे को संतुष्ट करेगा।
राजा राम
पूर्व आईजी आरपीएफ
लखनऊ
9390338701
Sindhis in india
Major Centrestor
to indian Economy
of Rich Heritao
जाति शब्द सिंधी भाषा में नहीं था, जैसे तेलुगु में जाति शब्द के लिए कोई शब्द होगा वैसे ही सिंधी भाषा में जाति शब्द के लिए nukh शब्द का उपयोग किया गया है।
हम 190 जातियों वाली लिस्ट देखें, उसमें जिलावार जातियों के नाम हर वर्ग में लिखे हैं, हमे ये तो पता ही है कि सिंध के किस जिले में हमारे पूर्वज रहते थे, तो उस जिले की लिखी जातियों में कौन सी जाति हम अपनाना चाहते हैं वो जाति चुन कर लिख दे। पर सावधानी ये बरतनी पड़ेगी कि हम कई पीढ़ियां ऊपर जाएं और 1931 की पीढ़ी के अपने पूर्वज का नाम पता करें और उनकी वंशावली के सभी लोग जो आज भारत में हैं एक ही जाति चुने और लिखें। थोड़ी मेहनत लगेगी सभी को ढूंढने में लेकिन ये एक तरीका हो सकता है। हमारी जाति अगर हरिद्वार या गया के पंडितों के पास न भी हो तो पूर्वज का नाम और जिला तो मिल ही सकता है अब उनके सभी वंशज उस जिले की एक जाति चुन कर लिख दे तो भी काम बन सकता है।
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